यातायात नियमों को पहले गहराई से समझीये, पर सरकारी फैसलों पर सवाल उठाइयेगा।

कितना आसान है ना सरकारी नियमों की अवहेलना करना। उस पर हँसी ठीठोली करना। सोचीये थोड़ा कि आखिर क्यों ऐसे नियमों को बनाया जाता है? क्यों हमें उसे पालन करने पर मजबूर किया जाता है?

नए मोटर वेहिकल एक्ट के तहत अगर आपने मोटर साइकल चलाते वक्त हेलमेट नहीं पहना है या आपके गाड़ी की कोई भी कागजात में कमी है तो आपको उसके बदले चालान भरना होगा एवं न्युनतम चालान 1000-RS का कटेगा।

लेकिन ये नौबत आयी कहाँ से? हम गाड़ी चलाते वक्त हेलमेट क्यों नहीं पहन सकते? हम गाड़ी के सारे कागजात सही क्यों नहीं रख सकते?

इसके गुनेगार कौन?

सरकार अगर कोई नियम बनाती है तो उसका उद्देश्य हम नागरिकों के हित में ही होता है। आय दिन रोड एक्सीडेंट की घटना सुनने अौर देखने को मिलती है, और आपको बता दे की रोड एक्सीडेंट का मुख्य कारण तेज गाड़ियों का चलना ही है।

कई शहरों के ट्रैफिक पुलिस लोगो को निजी स्तर से समझा रहें है साथ ही उन्हें बता रहे है की अगर गाड़ी संबंधित कागजों में कमी भी है तो कोई बात नहीं पर आप कम से कम हेलमेट जरुर पहने। इससे वो साथ साथ सामने पैदल चल रहे लोग भी सदर रहेंगे।

जब सीधे उँगली से घी ना निकले तब उँगली को टेढ़ी करनी पड़ती है। और मेरी माने तो ये कहावत यहां फीट बैठ रही है। अगर आपको यातायात नियमों को पालन करने पर अापत्ती है तो आप चालान भरे। यह बात बिल्कुल सही है की अाखिर कब तक हम सरकार के फैसलों पर सवाल करते रहेंगे। सरकार है, वो नियम अगर बनाती है तो हम नागरिकों को पालन करना होगा।

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