भू-जल समस्या से निपटने वाला कानून बनाएगी सरकार, पानी बर्बाद करने वाले सतर्क हो जाए
गर्मी के मौसम आते ही जमीन के नीचे के पानी की खत्म होने की समस्या अब तो बिहार में काफी आम हो गई है। पहले बिहार में इस प्रकार की पानी की दिक्कत है कभी भी नहीं आती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से बारिश ठीक से नहीं होने के कारण अथवा लोगों के पानी की अहमियत ना समझने के कारण भूजल दिन पर दिन कम होती जा रही है। जो कि अब एक बहुत ही बड़ी समस्या बनकर उभर रही है और इसे रोकने के लिए सरकार ने कानून बनाने की व्यवस्था कहने की पहल शुरू कर दी।
रविवार को इंडियन वाटर वक्र्स एसोसिएशन के 52वें वार्षिक सम्मेलन के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए सुशील कुमार मोदी जी ने अपने भाषण में कहा कि, “आने वाले दिनों में बिहार सरकार ‘भूजल संरक्षण विघेयक’ लाकर जमीन के नीचे के पानी के दोहन को नियंत्रित करेगी। 29 हजार करोड़ खर्च कर बिहार सरकार इस साल मार्च तक सभी घरों में पाइप के जरिए नल का जल उपलब्ध करा देगी। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत 3 लाख 50 हजार करोड़ खर्च कर प्रधानमंत्री ने 2024 तक देश के सभी घरों में नल का जल पहुंचाने का निश्चय किया है।”
इसके आगे वे कहते है कि, “पेयजल का 75 प्रतिशत हिस्सा बाथरूम और रसोई घर से होकर गंदे पानी के तौर पर नालियों में बहा दिए जाते हैं। इस पानी के पुनः उपयोग की सस्ती तकनीक विकसित करने की जरूरत है। जमीनी जल स्तर को रिचार्ज और वर्षा जल को संचय करके ही पानी के संकट का सामना किया जा सकता है, क्योंकि पानी किसी प्रयोगशाला और फैक्ट्री में नहीं बनाया जा सकता है। पूर्व के नीति निर्धारकों की गलतियों के कारण देश में पानी का अनियंत्रित दोहन हुआ है। पंजाब में धान तथा दक्षिण के राज्यों कर्नाटक आदि में गन्ना की खेती को प्रोत्साहित करने का ही नतीजा है कि वहां भू-जल स्तर तेजी से नीचे गिरा है। मुफ्त बिजली से किसानों ने पानी का अनियंत्रित दोहन किया नतीजतन आज पंजाब में भू-जल स्तर 600 से 700 फीट नीचे चला गया है। चेन्नई सहित देश के अनेक बड़े शहरों में गंभीर जल संकट है।”

