NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो ने अपराध की दुनिया महानायक ठहराया बिहार यू.पी को, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो। देश भर में जो अपराध होते हैं, उनका लेखा-जोखा यहां होता है। साल 2017 में अौर 2019 के अांकड़ो से पता चला है कि बिहार में सबसे ज्यादा दंगे हो रहे हैं। लिंचिंग कोई अपराध नहीं है और यूपी की महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित है ।

1. अभी भी NCRB के लिए मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिया जाना किसी अपराध की श्रेणी में आता नहीं है. लिंचिंग के कारणों में चोरी, गाय की तस्करी, बच्चों की चोरी, या धार्मिक तनाव फैलाने जैसे आरोप या अफवाहें शामिल रही आई हैं.

2. NCRB के ताज़ा आंकड़ों में एक नयी श्रेणी जोड़ी गयी है. एंटी-नेशनल तत्त्वों द्वारा की गयी हिंसा का ब्यौरा अलग से दिया गया है. इन एंटी-नेशनल लोगों की फेहरिस्त में माओवादी, उत्तर-पूर्व राज्यों के उग्रवादी और जिहादी या मजहबी आतंकवादियों को शामिल किया गया है.

3.पूरे देश में हत्या के कुल 28,653 केस दर्ज किये गए. जो 2016 के 30,450 के आंकड़े से 5.9 प्रतिशत कम है. 7,898 केसों में विवाद को हत्या का कारण माना गया है. पूरे देश में हत्या के सबसे अधिक मामले दर्ज किये गए हैं उत्तर प्रदेश में. यूपी के बाद इस लिस्ट में बिहार का नाम आता है. 2017 में बिहार में 2,803 हत्या के मामले दर्ज किये गए. लेकिन बिहार के केस में मामला उलटा है. 2016 के मुकाबिले बिहार में हत्या के मामले में बढ़ोतरी हुई है.

4. महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा पर आते हैं. इस सेक्टर में देश भर में 3,59,849 केस दर्ज किए गए. और यूपी ने इस लिस्ट में भी टॉप किया. कुल 56,011 केस. इसके बाद 31,979 केसों के साथ महाराष्ट्र और 30,002 केसों के साथ पश्चिम बंगाल का नंबर आता है.

5. इस रिपोर्ट में दंगों का भी ज़िक्र हैं. 2017 में दंगों के 58,880 मामले दर्ज किये गए. इनमें से बिहार से सबसे ज्यादा घटनाएं 11,698 दर्ज की गयी. इसके बाद यूपी का नंबर आता है, 8,990 केसों के साथ.

6. NCRB ने पहली बार फेक न्यूज़ को पहली बार अपने आंकड़ों में शामिल किया है. फेक न्यूज़ के सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश से आए, 138 केस. उत्तर प्रदेश से 32 केस और केरल से लगभग 18 केस दर्ज किये गए हैं.

7. अपराधों की संख्या पर बात. कुल 50,07,044 अपराध दर्ज किये गए. इसमें से 30,62,579 आईपीसी के तहत और 19,44,465 केस Special & Local Laws (SLL)के तहत दर्ज किये गए.

रिपोर्ट आने में देर क्यों हुई? किसी को कुछ नहीं पता. लेकिन क़ानून व्यवस्था सुधारने के यूपी सरकार के सभी दावों के बीच यूपी के ये आंकड़े हैं, और बिहार के नीतिश सरकार के दावों के बीच भी ये आंकड़े हैं, जो साफ़ कहते हैं कि हिंसा अभी भी चरम पर ही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *