तिरंगा भी ना बचा पाया इस मुस्लिम नौजवान को जिसकी मौत हुई NRC विद्रोही और समर्थकों के बीच झपट में

यह सारी घटना बिहार की राजधानी पटना के फूलवर्शरीफ कि है, 21 दिसंबर जब प्रदर्शनकारियों और नए अधिनियम के समर्थकों के बीच ईंटें उड़ने लगीं। जिसकी मौत हुई वह 18 वर्ष का था और उसका नाम वर्षीय अमीर हंजला था जो कि उस दिन फुलवारीशरीफ में नागरिकता संशोधन के विरोध में भाग ले रहा था।

आमिर को आखरी बार लोगो ने, जीन्स और लाल स्वेटशर्ट में, हाथ में तिरंगा लिए हुए, अपने जीवन के लिए दौड़ते देखा था। उनको आखरी बार आरएसएस के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और हिंदू अधिकार का एक ज्ञात केंद्र के पास जाते देखा था। उनके शरीर को फुलवारीशरीफ प्रखंड मुख्यालय के जलभराव वाले परिसर में 10 दिन बाद नए साल की पूर्व संध्या पर उतारा गया था। उसका सिर फोड़ दिया गया; उसकी छाती और पेट पर चाकू से वार के निशान थे।

आमिर के पिता से मीडिया की बात होने पर उन्होंने कहा कि, “वे राष्ट्रीय ध्वज का भी सम्मान नहीं करते। मेरा बेटा इसके साथ भाग रहा था, फिर भी उन्होंने उसे मार डाला”। वे आगे कहते है कि, “किस तरह के लोग तिरंगे को पकड़े हुए एक लड़के को मार देंगे? ” सोहेल ने कहा। “आप उस दिन के विरोध के चित्र और वीडियो देख सकते हैं। वह गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा था। हर कोई जानता है कि वह आरएसएस और बजरंग दल के लोगों द्वारा मारा गया था जो उस क्षेत्र में रहते हैं।” यह कहते हुए उनकी आंखे नम हो गई।

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