बिहार के डीजीपी के निर्देशन में तैयार किया जा रहा है प्रशासन को

बिहार में लॉ एण्ड आर्डर को दुरुस्त करने के लिए पुलिस अब अपना ध्यान गांव की ओर फोकस करेगी। बीते शनिवार को पुलिस मुख्यालय के साथ-साथ सभी आईजी, डीआईजी और एसपी के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग हुई। जिसमें ये फैसला हुआ कि हर गांव के गुंडों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस मुख्यालय ने दशहरा से पहले सभी सांप्रदायिक मामलों से जुडे केसों के निष्पादन का भी निर्देश सभी जिलों के एसपी को दे दिया है, जिससे पर्व त्योहार शांति से मनाया जा सके।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने निर्देश दिया कि हर गांव के एंटी सोशल एलिमेंट को पुलिस चिन्हित करे। थाने के रजिस्टर में एंटी सोशल एलिमेंट का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा।

डीजीपी ने उन थानों को भी विशेष निर्देश दिया है की रजिस्टर में नए अपराधियों के नामों को जोड़ा जाएगा। जो गुंडे 20-25 सालों से अपने इलाके में नहीं रह रहे हैं या फिर बुजुर्ग हो गए हैं उनके नाम को गुंडा रजिस्टर से हटाया जाएगा।

सभी एसपी को ये निर्देश दिया गया है कि सांप्रदायिक तनाव से जुड़े जो भी लंबित केस हैं उनको दुर्गा पूजा से पहले हर हाल में निपटा लिया जाय। इसके अलावा पूजा को देखते हुए जो संवेदनशील इलाके हैं वहां पुलिस के डेपुटेशन पहले तय कर लिए जाएं। बिहार में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए डीजीपी का ये निर्देश कारगर साबित हो सकता है।

 पहले 7 सितंबर को बिहार में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों का तबादला किया गया था। जिसमें 157 इंस्पेक्टर और 125 सब इंस्पेक्टर शामिल थे। इसके अलावा डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने राज्य में बढ़ रहे अपराध पर रोक लगाने के लिए पुलिस अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी और बेहतर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों को पुरस्कृत करने का वादा भी किया था।

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