आखिर कर मिल गया विक्रम ISRO ने बताया देश को, लैंड कराने की जगह की तलाश जारी।
ISRO के वैज्ञानिकों को पता चल गया है कि विक्रम लैंडर कहां है। 6 सितंबर को चांद पर लैंड होते वक्त लैंडर विक्रम का ISRO से संपर्क टूट गया था. इसकी वजह से वैज्ञानिक के साथ साथ पूरे देश हताश थी, निराश होगये थे. ISRO के मुखिया के सिवन तो इतने निराश हुए कि वो फूट-फूटकर रो पड़े. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें गले लगाकर धर्य रखने को कहा, लेकिन सीवन ने कामान संभाला और 7 सितंबर की शाम उन्होंने उम्मीद जताई थी कि ऑर्बिटर लैंडर का पता लगा लेगा.
आखिरकार मेहनत सफल हुआ 8 सितंबर की दोपहर तक चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम का पता लगा लिया है. ISRO के मुखिया के सिवन ने बताया है कि ऑर्बिटर में लगे ऑप्टिकल हाई रिजोल्यूशन कैमरा (OHRC) ने विक्रम लैंडर की तस्वीर खींच कर भेजी है. इसमें लैंडर सुरक्षित दिख रहा है, लेकिन वह लैंडिंग वाली तय जगह से 500 मीटर दूर उल्टा गिरा पड़ा है.

अब ISRO के वैज्ञानिक लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. ISRO हेडक्वॉर्टर से लैंडर को मैसेज भेजे जा रहे हैं. संपर्क होने के बाद पता चल पाएगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ चांद की सतह से 2.1 किमी की ऊंचाई तक आने के बाद विक्रम भटक गया.

अनुमान लगाया जा रहा है कि विक्रम लैंडर के साइड में लगे छोटे-छोटे 4 स्टीयरिंग इंजनों में से किसी एक ने काम न किया हो और विक्रम लैंडर अपने तय मार्ग से भटक गया हो. इसलिए अब ISRO के वैज्ञानिक ऑर्बिटर में लगे कैमरे से और भी तस्वीरें खींचने की कोशिश करेंगे ताकि सही-सही स्थिति का पता लग सके. वैज्ञानिक इसमें कामयाब भी होंगे, क्योंकि ऑर्बिटर में जो कैमरा लगा है, वो चांद की सतह से 1.08 फीट की ऊंचाई तक की कोई भी तस्वीर खींच सकता है. ISRO चीफ के सिवन ने बताया है कि वैज्ञानिकों को इस बात की उम्मीद है कि जल्दी ही लैंडर से संपर्क हो सकता है.
Credit Avinash

