बिहार सीएम कुर्सी के लिए लड़ रही पार्टियां फिर से जातिवाद पर उतार आई

मुख्य तौर पर बिहार की सियासत या तो लालू यादव के हाथ में नहीं या नीतीश कुमार के हाथ में, और दोनों ही नेता पिछड़ी जाति से आने वाले हैं। तो सवाल यह उठता है कि क्या इस बार के बिहार चुनाव में इस प्रथा को खत्म कर कोई स्वर्ण समुदाए से मुख्यमंत्री बन सकता है या नहीं।

इस सवाल पर बिहार बीजेपी के एमएलसी संजय पासवान ने मीडिया से बातचीत के बाद बयान मी कहा है कि, “आज की बिहार के सियासी हालात को देखते हुए सवर्ण समाज ने भी मान लिया है कि बिहार का मुख्यमंत्री कोई सवर्ण नहीं हो सकता।” यह बयान देकर संजय पासवान ने बिहार की सियासत को फिर से गर्म कर दिया है क्योंकि स्वर्ण समुदाय की सारी वोटे लगभग एनडीए को ही जाती है। आरजेडी भी इन वोटों के पीछे हाथ-पांव मार रही है, ताकि कुछ इनके झोली में भी आकर गिर जाए।

इस बयान के बाद आरजेडी भी भला क्यों चुप रहती, आरजेडी के एक स्वर्ण समुदाय से आने वाले वरिष्ठ नेता ने बयान में कहा कि, “पिछले तीस साल से बिहार में लालू यादव और नीतीश कुमार राज कर रहे हैं। दोनों पिछड़े समुदाय से आते हैं। ऐसी स्थिति में कोई भी पार्टी सवर्ण समुदाय से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार उतारने के बारे में सोच भी नहीं सकता। ये संभव ही नहीं है क्योंकि आज की सियासत पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित के इर्द-गिर्द घूम रही है।”

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