फिल्म “ARTICLE 15” से नाराजगी जता रहे उच्च जातियों के लोग, डायरेक्टर ने कहा समाज की यही है सच्चाई।

आज से 69 साल पहले संविधान के रचयिता डॉ बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा लिखे संविधान के ARTICLE 15 मे साफ लिखा गया है की राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के अाधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।

मगर यह भेदभाव अाज समाज मे एेसा भयानक रूप ले चुका है कि एक वर्ग दुसरे को अपनी अौकात दिखाने से पीछे नहीं हटता।

उन्हें खुद को बड़ा दिखाने से ज्यादा खुशी दूसरों को नीचा दिखाने मे अाता है। अामतौर पर एेसा देश के पिछड़े जगहों पर ज्यादा देखा गया है।
यह फिल्म समाज की सोच पर फेका गया थूक है, जिसे समाज अौर समाज में रहने वाले हम जैसे लोग पोछ कर दुबारा यही करने मे जुट जाते है।

फिल्म मे अायुष्मान खुराना अाइपीएस अधिकारी अयान रंजन की मुख्य भुमिका निभा रहे है। जिसकी पोस्टिंग युपी के भीतरी इलाके के लालगाँव में हो जाती है। वहाँ चीजें वैसी ही चलती है जैसे दशकों से चलती अा रही है।

बदलाव के लिए ना ही किसी ने दिलचस्पी दिखाई अौर ना ही कोशिश की।
भेदभाव किसी ऊँची अौर नीची जाति के बीच ही नहीं होता बल्कि दो लोगों के सोच मे होता है। यह स्थिति हमारे लिए कोई नयी बात नहीं है, इसका सामना हमें अाए दिन देखने को मिलता है। फिल्मों के माध्यम से समाज को अाएना दिखाने का सिलसिला बहुत पुराना हो चुका है पर कसक यह रह जाती है कि अाज भी हमारी विचारधारा वहीं के वहीं है।

खैर फिल्म देखने के बाद भी बदलाव को कोई खास उम्मीद नहीं है लेकिन जाये देखकर अाये, शायद खुद मे सुधार करना चाहे अाप।

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