बिहार में थानेदारो से छीनी गई थानेदारी, करार किया गया दागी अफसर, ये थे कारण.

15 अगस्त आने वाला है और इसकी तैयारी देशभर मे जोर शोर से चल रही है। बिहार में भी इसकी तैयारी चल रही है साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था को मद्दे नजर रखते हुए कार्यों को किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को सख्त आर्डर जा रहे है औरर कार्यों में ढिलाई करने वालो पर कारवाई हो रही है।

आपको को बता दे कि राज्य के सभी थानों में 15 अगस्त से अपराध नियंत्रण व विधि-व्यवस्था और  अनुसंधान विंग अलग-अलग काम करने लगेंगे। इससे पहले बिहार में 1075 थानों और 225 आउटपोस्ट में तैनात दागी थानेदार और ओपी प्रभारी को हटाने की समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो गयी।

जानकारी के अनुसार ऐसे अफसरों को दागी माना गया है जो शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू नहीं करवाया, जिसने विभागीय जिम्मेदारी नहीं निभाई, जिसने महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया, जिसपर भ्रष्टाचार का आरोप है, जिनकी अभिरक्षा के दौरान किसी के साथ हिंसा हुई हो, जिन पर विभागीय कार्यवाही लंबित है, जिसे कोर्ट ने दोषी करार दे चुका है अादि।

 फौरी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में दागी इंस्पेक्टरों की संख्या करीब 800 है। इसके लिस्ट इस तरह है:
गया- 10 इंस्पेक्टर और 5 दरोगा
भोजपुर- 22 थानेदार और 4 सर्कल इंस्पेक्टर
जहानाबाद- 12 थानाअध्यक्ष और 2 आप प्रभारी
सीवान- 10 थानेदार

पुलिस मुख्यालय ने जुलाई के पहले सप्ताह में दागी सर्किल इंस्पेक्टर व थानेदारों को हटाने का निर्देश दिया था। इस आदेश पर पहले 31 जुलाई तक अमल किया जाना था। बाद में इसे बढ़ाकर आठ अगस्त कर दिया गया। जिन सर्किल इंस्पेक्टर, थानाध्यक्ष अथवा ओपी प्रभारी के पदों से जिन अफसराें को हटाया गया है।

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